देहरादून। शहर में पिछले तीन दिनों से चल रहा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को समापन की ओर पहुँचा। अंतिम सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जहाँ परिषद के पदाधिकारियों ने उन्हें प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और युवा नेतृत्व से जुड़े विषयों पर मंथन हुआ।

सम्मेलन के दौरान प्रतिष्ठित ‘प्रोफेसर यशवंतराव केलकर युवा पुरस्कार’ की घोषणा भी की गई। मुख्यमंत्री धामी ने इस वर्ष का सम्मान गोरखपुर के युवा श्रीकृष्णा पांडेय को प्रदान किया। पुरस्कार वितरण के समय एबीवीपी के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने बताया कि यह सम्मान 1991 से प्रख्यात शिक्षाविद् और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार माने जाने वाले प्रो. केलकर की स्मृति में दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रो. केलकर ने अभाविप को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार और मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। यह पुरस्कार अभाविप और विद्यार्थी निधि न्यास की संयुक्त पहल है, जिसका उद्देश्य शिक्षा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना है।

पुरस्कार का उद्देश्य और महत्व

इस सम्मान का मुख्य लक्ष्य ऐसे युवा भारतीयों को सामने लाना है, जो सामाजिक उद्यम, शिक्षा, पर्यावरण, विज्ञान और समाजहित से जुड़े क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं।
पुरस्कार के तहत विजेता को 1 लाख रुपये की राशि, प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न प्रदान किया जाता है।

सम्मेलन के समापन के साथ ही एबीवीपी ने विभिन्न अकादमिक, सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर आगे की कार्ययोजना की रूपरेखा भी साझा की। संगठन ने कहा कि आने वाले समय में छात्र शक्ति देश के विकास में और अधिक बड़ी भूमिका निभाएगी।

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